समीक्षक - संजय कौशिक 'विज्ञात'
बारिश में भीगती नदी
आरती सिंह एकता
बस्तर अंचल में जन्मी पैतृक स्थान वाराणसी से संबंधित हरिद्वार उत्तराखंड की पावन गङ्गा के क्षेत्र में पली और बढ़ी और हाल ही में नागपुर महाराष्ट्र में प्रतिष्ठित परिवार का हिस्सा बनकर रह रही कवयित्री आरती सिंह 'एकता' बहुत ही कम समय में अपने विख्यात नाम से अलग पहचान बन चुकी हैं जो किसी परिचय की अपेक्षा नहीं रखती ....
अभी कुछ समय पूर्व ही एक दिन अचानक डाक द्वारा मुझे उनकी एक उपलब्धि प्राप्त हुई। उनका एकल काव्य संग्रह जिसका शीर्षक बारिश में भीगती नदी ... मानवीकरण धारा तथा प्रकृति नेह और अनछुए रहस्य का कविता के माध्यम से अंतःकरण को छू जाने की कला का एक उत्तम संगम प्रवाह इस संग्रह में देखते ही बनता है। कवयित्री एकता की कल्पना शक्ति रचना प्रति रचना प्रशंसा की पात्रा है। भाषा शैली सरल सरस एवं इतनी सहज है कि पाठक वर्ग आनंद की लहरों में भावों की गहराई में डूबता ही चला जाता है। 96 पृष्ठ में समाहित यह काव्य संग्रह बहुत ही आकर्षक और मन मोहक सशक्त भावाभिव्यक्ति का ऐसा अनूठा बेजोड़ संकलन कहा जा सकता है जो नवांकुरों के लिए प्रेरणा का केंद्र तो है ही साथ ही जो कविता के निकट नहीं आ सके हैं, यदि उन्होंने इस संकलन को पढ़ा तो वे भी काव्य सीखने रचने और संग्रह को पूरा पढ़ कर आनंद की गहराइयों से वंचित रहना नहीं चाहेंगे ...
संग्रह में रंगीन पृष्ठों की उपस्थिति इस संग्रह की बनावट को चार चांद लगा रहे हैं। संग्रह श्री माँ के रंगीन पृष्ठ समर्पण से प्रारम्भ होता है अपनी बात में कवयित्री ने अपने सशक्त पक्ष को रखा है जो संग्रह के प्रति आकर्षण पैदा करने के लिए एक सार्थक और सुंदर प्रयास दिखता है। संक्षिप्त और सार गर्भित भूमिका उषा अग्रवाल पारस नागपुर द्वारा लिखी गई है जबकि मुख्य भूमिका भी संकलन में सम्मिलित की गई है जो डॉ. आशीष कंधवे दिल्ली ने लिखी है।अनुक्रमणिका संग्रह का परिचय स्वयं देती है। आवरण गत्ते की बंधाई में है इतना सुंदर संग्रह जिसका मूल्य भी अधिक नहीं मात्र 300 रुपये लिखा गया है इससे प्रतीत होता है पुस्तक का मूल्य केवल खर्च को ही पूर्ण कर रहा है कवयित्री का उद्देश्य रॉयल्टी से कमाई करना नहीं। विश्व हिंदी साहित्य परिषद प्रकाशन का यह प्रयास सराहनीय है। पुस्तक पाठक वर्ग के लिए तैयार है। मैं स्वयं इस संग्रह के प्रति आकर्षण की चर्चा करूँ तो अस्वस्थ होने के पश्चात भी पढ़ते रहने को मन रहा और अंततः आज पूर्ण हुआ तो आप सभी के समक्ष इस संग्रह की संक्षिप्त समीक्षा प्रेषित कर रहा हूँ और कवयित्री एकता को उपलब्धि की अनंत बधाई प्रेषित कर शुभकामना देता हूँ अपने सृजनकार्य निरन्तर करती रहें ... और पाठक वर्ग को इसी प्रकार सुंदर और प्रेरणादायक रचनाओं से मंत्र मुग्ध करती रहें। पाठक वर्ग पुस्तक को पढ़ने के पश्चात अपनी प्रतिक्रिया खुशी में स्वयं व्यक्त भी करेगा और अन्य साथियों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा ऐसा मेरा अनुमान है। पाठक का पैसा वसूल करवाने वाला यह संग्रह साहित्य जगत में स्थापित होकर एकता नाम को एक सम्मान दिलाने में सफल सिद्ध हो सके पुनः अशेष शुभकामनाएं ....
बहुत ही खूबसूरत समीक्षा....इसे पढ़कर संग्रह पढ़ने की इच्छा जाग उठी। एकता जी को अनंत शुभकामनाएं 💐💐💐💐💐
ReplyDeleteसुंदर साथ गर्वित समीक्षा
ReplyDeleteनमन गुरु देव 🙏
सुंदर साथ गर्वित समीक्षा
ReplyDeleteनमन गुरु देव 🙏
बहुत ही सुन्दर और सार्थक समीक्षा ।
ReplyDeleteपूरी समीक्षा मैंने पढ़ी उससे पहले मैंने कवयित्री के विचार भी पढ़े थे आपने समीक्षा में उनके व्यक्तित्व को बखूबी निखारा और सारगर्भित सुंदर समीक्षा साथ में दी समीक्षा पढ़कर पुस्तक पढ़ने का मन होता और वास्तव में कवयित्री हम सभी के लिए प्रेरणा की स्रोत बनेंगी और हम भी अपना एकल संग्रह प्रकाशित कराने की ओर अग्रसर होंगे।
ReplyDeleteबहुत ही शानदार समीक्षा आपकी गुरुदेव 🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteसुंदर समीक्षा जो प्रेरित कर रही है हम जैसे रचनाकारों को आगे बढ़ने के लिए। 💐💐💐🙏🏻🙏🏻💐💐💐
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