सपना की काव्यांजलि
एक नज़र समीक्षा की दृष्टि से ....
संजय कौशिक 'विज्ञात'
कवयित्री अनिता मंदिलवार "सपना" ने जीव विज्ञान स्नातकोत्तर, हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर तीन-तीन स्नातकोत्तर करने के पश्चात जीव विज्ञान से ही अध्ययन अध्यापन कार्य से जुड़ी हुई हैं ऐसे में हिन्दी भाषा पर गहरी पकड़ बनाये रखते हुए लेखन की अनेक विधाएं कलम के माध्यम से सिद्ध हस्त हैं जिससे यह कहा जा सकता है कि कवयित्री को माता वीणापाणि का विशेष स्नेहाशीष प्राप्त है। 'सपना की काव्यांजलि' काव्य-संग्रह में बहुत ही सरलता है। आम बोल-चाल के हिन्दी शब्दों का प्रयोग कर उत्तम कहन को पंक्तिबद्ध किया गया है। कहीं कहीं तत्सम शब्दों का भी प्रयोग है तो कहीं तद्भव शब्दों का एक अनूठा प्रयोग करते हुए आंचलिक सम्पुट सहित इस काव्य संग्रह को श्रेष्ठ धाराप्रवाह में प्रवाहित किया है। छंद मुक्त, गीत, नवगीत, हिन्दी ग़ज़लनुमा कविता आदि जितनी भी विधाएं लिखी गई हैं सभी विधाओं में कवयित्री की कलम सिद्ध कलम की तरह चली है। अलंकारों के जोखिम से बचते हुए कविता संग्रह को क्लिष्टता से बचाकर सुनियोजित ढंग से संवारा गया है। जिसकी प्रत्येक कविता को भिन्न-भिन्न पाठक वर्ग द्वारा सहजता से पढ़ा और समझा जा सकेगा। कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की कविताओं में बिम्ब शैली अच्छे से निखर कर समक्ष आती है। कवयित्री का कविता सृजन कार्य जिन दृश्यों से प्रेरित हो कर हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि उन दृश्यों ने कवयित्री के अंतः करण को गहराई तक छू लिया है। तभी कविताओं का भाव मर्मस्पर्शी होते हुए पूर्णतः निखर कर प्रकट हुआ है।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना का लेखन अनुभव लगभग 25 वर्षों से निरन्तर चलता आ रहा है। इस समयावधि में अनेक नाटक लिखे हैं जिन्हें आकाशवाणी द्वारा समय समय पर प्रसारित किया गया । घर आंगन कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्त्ता के रूप में सजीव कार्यक्रम प्रस्तुत भी किया है। आकाशवाणी द्वारा वाणी प्रमाणपत्र प्राप्त कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना सहित्यिकी कार्यक्रम के अंतर्गत कविताएं एवं कहानियों सहित कई रूपक भी प्रस्तुत करती रही हैं। 6 लघु काव्य संग्रह एवं 50 से अधिक साझा संग्रह में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। ऐसे में इस उपलब्धि से कहा जा सकता है कि कवयित्री 'अनिता मंदिलवार सपना' पाठक वर्ग की नब्ज को अच्छे से समझती और जानती भी हैं जिसके कारण यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि कवयित्री का यह काव्य संग्रह "सपना की काव्यांजलि" पाठक वर्ग द्वारा खूब सराहना प्राप्त अवश्य करेगा।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की कविता उपकार एक भावनात्मक शैली में लिखी गई कविता है मानव जीवन मिला तो ईश्वर के आभार से शुरू करते हुए माता की ममता के उपकार पिता के उपकार को साभार मानते हुए जिन्होंने पठन पाठन में अभिरुचि उतपन्न की ऐसे गुरुवर के उपकार सहित परिणय सूत्र में बंधी अपने पति महोदय का भी आभार माना है जिन्होंने लड़की से स्त्री फिर सन्तति प्राप्ति के पश्चात माता की पदवी दिलाई कुल मिलाकर कवियत्री के भाव सम्पूर्ण नारी जगत के भावों का प्रतिनिधित्व करती हुई श्रेष्ठ मनोभाव अभिव्यक्ति कही जा सकती है जीवन लेकर अपने परिवेश में जिस-जिस के सम्पर्क में रही और सभी से जीवटता का सार प्राप्त किया सभी का आत्मीय आभार प्रकट करती हुई रचना का शीर्षक उपकार न्यायसंगत है।
कोई बात बने शीर्षक से लिखी गई कविता मात्रा भार समान वाली सुंदर गेयता लिए हिन्दी भाषा में ग़ज़ल के समान सुंदर लय धारण किये हुए है बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति है। साधारण व्यक्ति के अंतरमन को छू जाने की अद्भुत क्षमता है कवयित्री में सुंदर संदेशात्मक कथन भी विद्यमान हैं अगर बेटियाँ उड़े गगन में ऊपर तक यहाँ कल्पना चावला, सुनीता का नाम नहीं है फिर भी विद्यमान है उन्हें प्रेरणा स्रोत बना कर आगे बढ़ने का बेहतर सन्देश है बंध में बेटियों को आगे बढ़ावा देने के आग्रह सहित कवयित्री ने उत्तम और श्रेष्ठ निष्कर्ष भी दिया है समाज में बदलाव की जिस क्रांति लाने को उनका मन बेचैन रहता है उसे कोई बात बने में अच्छे से सँवारा और उकेरा गया है अंत मे देशभक्ति को सर्वोपरि बताया इसे ही एक नया धर्म बनाने की कल्पना के पंख लिए उड़ान भरती रचना अपनी मंजिल तक पहुंच रही है।
नवगीत विधा पर कलम चलाते हुए कवयित्री ने आ बैठे उस पगडण्डी पर जिससे जीवन शुरू हुआ बहुत सुंदर लय बांधे हुए है इस गीत में सुंदर कहन का प्रयास किया बिम्ब सटीकता के चरम पर हैं पाठक गण इसे गुनगुनाते हुए मंत्रमुग्ध से रहेंगे। बेहद आकर्षित करता प्रेरणादायक स्वतः बोलता नवगीत है। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कवयित्री जिस विधा पर भी कलम चलाती है वह विधा इन्हें स्वयं बाहें फैला कर स्वीकार कर लेती है और अपनत्व से गले लगाकर इनकी कलम के साथ साथ चलती है।
गीत विधा पर भी कवयित्री ने लयात्मक कलम चलाई है। बहुत ही अधिकार स्वरूप मुखड़ा लिया है एक तू ही तो अपना है बाकी सब सपना है प्रियतम के प्यार की उपमा अनमोल गहने से करना कवयित्री की भारतीय परम्परा एवं संस्कारों की मनोदशा को भी प्रदर्शित करती है प्रियतम का विरह या प्रियतम द्वारा दी जाने वाली पीड़ा को अपनी किस्मत मान चुकी कवयित्री की नायिका कल्पना अपनी सहन शक्ति का प्रमाण दे रही है तू थक तो नहीं गया मुझे बता दे बस, कि और कितना सहना शेष है कवयित्री की कल्पनाओं की वह नायिका दृढ़ संकल्पित है उन दुःखों के क्षणों में अपने जीवन साथी के साथ जीवन यापन करने के लिए, वह उनसे पीछा छुटाने की चाह तक नहीं रखती और कहती है कि एक तेरे सिवाय अपना किसी को नहीं मानती और जो दिख रहे हैं वो छलावा रूप में महज एक स्वप्न हैं कवयित्री कहती हैं कि तुम भले ही भूल गए हो पर वो इस विरह की आग में तपने के लिए तैयार है क्योंकि स्वर्ण बिना ताप के कभी भी महंगा कुंदन नहीं बन सकता और वो अगर भूला नहीं है तथा अधिकार स्वरूप किसी बात से रूठ कर चला गया है तो मिलन की माला जपने का भी संदेश देती है क्योंकि तेरे बिना मेरा भी अपना कोई नहीं है और यदि कोई समक्ष दिख रहा है तो वो मिथ्या स्वप्न है इस गीत में सुंदर लय गहरे भाव आत्मीयता के संबंध को निभाने का संकल्प, समर्पण, निश्छल प्रेम, विरह सब कुछ दिया है कवयित्री ने लाजवाब रचना पाठक एक बार पढ़ेगा तो बार-बार अवश्य पढ़ेगा।
सत्य और असत्य का भेद उल्लेखित करती रचना सत्य अटल पर झूठ चमकता में कवयित्री ने झूठ को मोती की चमक की उपमा दी है और इसे खोखला बताया है इससे बचने का भी संदेश दिया है भ्रमित करने वाली चमक और ऊँचें दामों की खनक भी सत्य की अटल सत्यता को कभी भी पछाड़ नहीं पाएगी इस प्रकार से बहुत सुंदर भाव और शानदार संदेश देती हुई रचना अच्छे भावों के साथ सरल शब्दों में लिखी गई है इस रचना को पाठक वर्ग द्वारा खूब सराहना मिलेगी।
लाल तुम कहाँ गए कविता में पुलवामा से बालकोट तक के विस्फोटक हादसे से अपने पुत्र को गंवा चुकी माताओं पीड़ा तिरंगे के प्रति प्रेम भाव, जयचंदी गद्दारों पर कटाक्ष, जन्मभूमि के सजग रक्षक, के प्रति माँ का करुण क्रंदन का बिम्बात्मक चित्रण सहित अगली कविता ... कविता तुम कहाँ हो समस्त रसों में व्याप्त कविता का अच्छा मानवीकरण श्रृंगार कर बोलती कविता प्रतीत होती है अगली कविता कलम आज उनकी जय बोल अपने शीर्षक का स्वयं परिचय देती बहुत शानदार कविता है अगली कविता सोपान सुंदर लय और गेयता लिए गहरे भाव की कविता है जिसे पढ़ने से पता चलेगा कि सोपान कितने बाकी हैं अगली कविता सखी, सावन आयो रे आंचलिक सम्पुट से सुसज्जित कविता मन को गुदगुदाने वाली बहुत शानदार कविता है
अंततः इतना कहना अवश्य बनता है कि कवयित्री ने जिन जिन विषय को संग्रह में लिखा है वो दिखने साधारण विषय अवश्य हैं पर गहराई लिए हुए हैं पाठक वर्ग के सभी रस इसमें विद्यमान हैं अनुपम काव्य संग्रह है ये सपना की काव्यांजलि...
रवीना प्रकाशन से प्रकाशित होने वाला काव्य संग्रह सपना की काव्यांजलि अनुक्रमणिका पृष्ठ संख्या के पश्चात कवयित्री ने इस संग्रह को अपने स्वर्गीय माता-पिता को समर्पित किया है शुभकामना संदेश 1.. टी.एस. सिंहदेव मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा, शिक्षा, वाणिज्यिक कर 2. डॉ. प्रेमसाय सिंह, स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, सहकारिता छत्तीसगढ़ शासन 3. राजकुमार धर द्विवेदी, वरिष्ठ उप सम्पादक, दैनिक नई दुनिया रायपुर छत्तीसगढ़
4 अमरेश्वर दुबे, पूर्व कार्यक्रम अधिकारी आकाशवाणी 5. महेश कुमार शर्मा राष्ट्रीय मंत्री अ. भा. राष्ट्रीय कवि संगम 6. शैलेन्द्र श्रीवास्तव स्वतंत्र लेखक 7. महातम मिश्रा गौतम गोरखपुरी 8. जे पी श्रीवास्तव 9. गिरीश गुप्ता ने दिए हैं । काव्य-संग्रह की भूमिका डॉ. सपन सिन्हा, मनेन्द्रगढ़ कोरिया छत्तीसगढ़ के कर कमलों से लिखी गई है जो पाठक वर्ग को कवियत्री से परिचित करवाने के लिए एक सार्थक प्रयास कहा जा सकता है
पुस्तक का कमजोर पक्ष: कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना एक नाम ही पर्याप्त है जो त्रुटियों को दूर करने में सक्षम एवं समर्थ है। मेरे विवेक के अनुसार तो 'सपना की काव्यांजलि' काव्य-संग्रह में भक्तिरस, प्रेमरस, विरहरस, वीररस, करुणरस, विद्यमान होते हुए अनेक अलंकारों से अलंकृत काविताओं का एक सुंदर महकता बगीचा है। जिसकी प्रत्येक कविता रूपी पुष्प की खुशबू विशेष एवं पृथक है। जिससे यह संग्रह सुवासित हो रहा है। कुछ एक में भाव पक्ष के दोहराव से बचा जा सकता था। कहीं बहुवचन लिखा गया है वहाँ एक वचन लिखा जाता तो स्पष्टता निखर कर आती कहीं कहीं लय बाधा दिखाई अवश्य देती है हालांकि कवयित्री के कंठ को माता वीणापाणि का विशेष वरदान प्राप्त है इस कमी को वो स्वयं की गेयता में महसूस नहीं होने देंगी। अंततः इतना कहना अवश्य बनता है कि कवयित्री ने कविताओं के सृजन की साधना कुशलता पूर्वक संम्पन्न की है। संग्रह के मुख्य आवरण, शीर्षक और पृष्ठ संख्या ....... सहित प्रकाशकीय मेहनत से संग्रह को चार चांद लग गए हैं। पाठक वर्ग कवियत्री के इस संग्रह को पढ़ने के बाद कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना के लिखे अन्य कविता संग्रह को भी ढूंढ ढूंढ कर पढ़ने की इच्छा अवश्य रखेगा।
संजय कौशिक 'विज्ञात'
बहुत ही सुंदर समीक्षा आदरणीया अनिता मंदिलवार 'सपना' जी को बहुत बहुत बधाई इस शानदार संग्रह के लिए 💐💐💐💐💐
ReplyDeleteआ0 विज्ञात जी आपने कवयित्री के बहुआयामी व्यक्तित्व से परिचित कराया और पुस्तक और उनकी लेखनी के विविध रूप से ।
ReplyDeleteपुस्तक को पढ़ने की तीव्र उत्कंठा है।इसे मैं अवश्य पढ़ना चाहूँगी ।
आपको और अनिता जी को हार्दिक शुभकामनाएं ।
ये मेरा सौभाग्य है कि मैं आप सब से जुड़ी हूँ ।
पुनश्चः एक बार और हार्दिक बधाई
बहुत बधाई अनिता सखी को और आपको आदरणीय ।
ReplyDeleteबहुत उत्तम समीक्षा।
बहुत बहुत बधाई हो सपना दीदी जी
ReplyDeleteबहुत बहुत बधाई हो सपना दीदी जी
ReplyDeleteअनीता जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं
ReplyDeleteधन्यवाद संगीता जी
Deleteये मेरा सौभाग्य है गुरू स्वरूप आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी की समीक्षा पुस्तक को मिली । शब्दों से आभार कहना मुश्किल है । आप मेरे प्रेरणा है । आगे भी आपका सानिध्य मिलता रहे ।माता शारदे की कृपा बनी रहे ।
ReplyDeleteसपना जी बहुत बहुत बधाई
ReplyDeleteवाह आदरणीय बहुत ही सुंदर समीक्षा👏👏👏सच में इस समीक्षा को पढ़ने के पश्चात् इस संकलन को पढ़ने की जिज्ञासा बनी।इस संकलन के लिए अनिता जी को हार्दिक बधाई 👏👏👏👏
ReplyDeleteबहुत गहन विस्तृत समीक्षा आदरणीय!🌷🙏🌷 अनीता मंदिलवार सपना जी को हार्दिक बधाई!इसी प्रकार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती रहें ईश्वर से यही कामना है!🙏🌷🌷
ReplyDeleteआपको बहुत बहुत बधाई अनिता जी💐💐आदरणीय विज्ञात जी द्वारा बहुत ही सुंदर समीक्षा की गई है जिससे इस संग्रह को जल्दी से जल्दी पढ़ने की इच्छा है।
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