Tuesday, May 18, 2021

उफान के उपरांत- त्रिसूत्री अनूठा उपन्यास की समीक्षा, साहित्यकार : संजय कौशिक विज्ञात : के द्वारा


डॉ. राजेन्द्र मिलन आगरा 

उफान के उपरांत-
       त्रिसूत्री अनूठा उपन्यास
की समीक्षा साहित्यकार संजय कौशिक विज्ञात के द्वारा 

हिंदी साहित्य में यह उपन्यास  मातृभाषा हिंदी एवं हिंदी पत्रकारिता तथा सीमा पर तैनात वीर जवानों की प्राण पर खेल जाने की ललक को बुलंदियों पर पहुंचाने वाला एक कालजयी जीवंत दस्तावेज है जो हिंदी साहित्य की निधि में सूर्यमणि की तरह दैदीप्यमानन है । उपन्यास के शीर्षक उफान के उपरांत की सार्थकता सिद्ध करने में लेखक के अंदर सआदत हसन मंटो और कमलेश्वर जैसे महान कथा शिल्पियों की आत्माओं का अपूर्व संगम प्रवेश करता जान पड़ता है। आगरा के  बहुआयामी रचनाकार मिलनजी के विविध विधाओं - व्यंग्य कविता कहानी पर्यावरण पर्यटन  रिपोर्ताज आदि में मूल्यांकन किया जाए तो इनकी प्रतिभा का लोहा मानना ही पड़ेगा ।मुझे यहां उपन्यास के संदर्भ  में यह  कहना है कि हिंदी साहित्य के इस बेजोड़ उपन्यास को पढ़ने पर शुरू में ऐसा एहसास होता है कि हम किसी सैक्स से सराबोर रंगीले रोमांचकारी उपन्यास को पढ़ रहे हैं किंतु जैसे -जैसे हम आगे पढ़ते हुए इस उपन्यास के अंतिम सोपान पर पहुंचते हैं तब लेखक की लेखनी पर नतमस्तक हो जाते हैं  । उपन्यास की अतिरिक्त विशेषता यह है इसमें डायरी ,आत्मकथा एवं औपन्यासिक शैली की त्रिपथगा का अनूठा आनंद भी मिलता है और उपन्यास को अन्त तक पढ़ने की लालसा भी बनी रहती है । 
अधिक और कुछ न कहकर मैं, डा. राजेंद्र मिलन को सादर प्रणाम करते हुए उनके इस उपन्यास का हृदय से स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं ।

साहित्यकार संजय कौशिक 'विज्ञात'
वार्ड नं. 2 संगम कॉलोनी बिहोली रोड़ निकट हनुमान मंदिर समालखा, पानीपत, हरियाणा पिन - 132101
चलभाष 9991505193
अणु डाक vigyaatprakashan@gmail.com


8 comments:

  1. बहुत ही खूबसूरत और सटीक समीक्षा 👌
    इतने वरिष्ठ साहित्यकार का उपन्यास निश्चित ही पाठकों को आकर्षित करेगा। आपकी समीक्षा ने उसमें चार चाँद लगा दिए 🙏 हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं 💐💐💐💐

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  2. यह उपन्यास अपने आप में अनूठा और बेजोड़ है पाठक वर्ग पढ़ कर प्रमुदित हृदय से उपन्यासकार के साथ हर्षित भाव से सीधा जुड़ा हुआ महसूस करेगा डॉ. मिलन साहेब को अनंत बधाई एवं शुभकामनाएं 💐💐💐

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  3. बहुत ही सुन्दर समीक्षा उपन्यास की ।
    पढ़ने की इच्छा हो गयी ।

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  4. बहुत सुंदर समीक्षा है
    नमन गुरु देव 🙏

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  5. *धनेश्वरी सोनी*

    सुंदर समीक्षा
    आ. सर जी

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  6. बहुत शानदार समीक्षा आदरणीय गुरदेव बहुत सारी शुभकामनाएं ढ़ेरो बधायाँँ हमे भी इतंजार है आपकी इस किताब का🙏🙏🙏👌👌👌

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  7. बहुत ही शानदार कृति गुरु देव के श्री चरण कमलों में सादर नमन।
    उपन्यास पढ़ने का मुझे काफी शौक रहा है । विशेष रूप से मैं वेदप्रकाश शर्मा के उपन्यास के कथानक के विशेष रूप से प्रशंसक रहा हूं ।आपकी लेखन शैली लाजबाव और सराहनीय रही है । दरअसल जब हम समाज के किसी भी रूप का गहराई से अध्ययन करते हैं तो बहुत सी बातें समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरती है वही बात आपकी लेखन शैली में भी स्पष्ट दिखाई देती है ।
    🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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  8. बहुत ही उत्तम समीक्षा

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