स्वप्न सिंदूरी
एक नज़र समीक्षा की दृष्टि से ....
कवयित्री अनिता मंदिलवार "सपना" ने जीव विज्ञान स्नातकोत्तर, हिन्दी साहित्य और अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर तीन-तीन स्नातकोत्तर करने के पश्चात जीव विज्ञान से ही अध्ययन अध्यापन कार्य जारी रखा है। ऐसे में हिन्दी भाषा साहित्य की गद्य और पद्य पर मजबूत पकड़ भी बनाये रखी है। कवियत्री को लेखन की अनेक विधाएं कलम सिद्ध हस्त प्रतीत होती हैं। 'स्वप्न सिंदूरी' काव्य-संग्रह में बहुत ही सरलता, सहजता, काव्य-प्रवाह, तुकांत अतुकांत अनेक रसों का समावेश की गई सभी प्रकार की कविताए हैं। छंद मुक्त, गीत, नवगीत, हिन्दी ग़ज़लनुमा कविता आदि जितनी भी विधाएं लिखी गई हैं सभी विधाओं में कवयित्री की कलम अपने भाव कहने में सफल रही है।
स्वप्न सुंदरी काव्य संग्रह की कविताओं को जिस भी पाठक वर्ग द्वारा पढ़ा जाएगा तो सहजता से समझा भी सकेगा। कवयित्री का कविता सृजन कार्य मर्मस्पर्शी रहा है। आहत मन से वेदना स्वर फूटता है वो देखते ही बनता है। प्रत्येक विषय के प्रति गाम्भीर्य भाव, गहराई तक समझने की विद्युत सी शक्ति, सुलझा हुआ व्यक्तित्व एवं कोमल हृदयी भाव इन कविताओं से स्पष्ट झलकता है। जो प्रत्येक कविता में पूर्णतः निखर कर प्रकट हुआ है।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना द्वारा लिखी गई यह कविता उनकी प्रतिनिधि रचनाओं में से एक है। स्वप्न सिंदूरी छंदमुक्त होने के साथ-साथ तुकांत और लय बद्ध कविता है इस रचना में उनके स्वप्न सिंदूरी उड़ान की कल्पना और यथार्थ का मिश्रण विद्यमान है कवयित्री के स्वप्न की नायिका अपने नायक का साथ प्राप्त होने की कल्पना को यथार्थ में देखते हुए एक अनोखे स्वप्न के सफर पर निकल पड़ती है जिसे स्वप्न सिंदूरी शीर्षक दिया है। कथन सरल सरस मधुर और रोमांचित कर देने वाले हैं जिनकी सराहना बनती है। इस रचना में नायिका के अपने नायक के लिए समर्पित भाव का मनोहारी चित्रण किया गया है। नायिका की कल्पना उड़ान को क्षितिज के पार तक ले जाने का सार्थक प्रयास रहा है। अंत में सपनों में सपना की ही बात हो में कवयित्री द्वारा शीर्षक की महत्वता को स्पष्ट किया गया है। पूरी कविता पढ़ने से शब्द संयोजन, भाव का गूंथा रहना क्रम से कथ्य पाठक वर्ग को बांधे रखने के लिए पर्याप्त है।
स्वप्न शीर्षक से लिखी गई यह कविता कवयित्री की प्रतिनिधि रचनाओं में से एक है छंदमुक्त होने के साथ-साथ इस रचना में उनके कथन की प्रशंसा बनती रचना में मानवीकरण का प्रयोग, संदेशात्मक भाव प्रत्येक विषय को आत्मीयता से लिखने का प्रयास एक सफल प्रयास कहा जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त में जागने के लाभ बताते हुए जो सूर्योदय के पश्चात जागते हैं उन पर दबी कलम से कटाक्ष भी सराहनीय है। स्वप्न को यथार्थ तक ले जाने के लिए सकर्म मेहनत से सफलता पाने की प्रेरणा देती एक सुंदर रचना कवयित्री का संदेश परक मस्तिष्क भी स्पष्ट झलकता है। इस कविता के माध्यम से सुनहरी इतिहास गढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं शब्द संयोजन सरल है, कहन सीधा सपाट है पाठक वर्ग पढकर प्रोत्साहित अवश्य होंगे।
सावन शीर्षक से लिखी यह रचना कवयित्री की कल्पना का एक और सुदृढ पक्ष प्रस्तुत कर रही है। विरह वेदना रस में लिखी इस कविता में कवयित्री ने विरह अगन को भी बहुत ही सुंदर बिम्ब एवं मानवीकरण का प्रयोग करते हुए आम आदमी की भाषा शैली में ढाल दिया है। कविता की सरंचना प्रारम्भ से अंत तक लय बद्ध रही है। भाव निखार पर हैं पाठक वर्ग के द्वारा इस रचना को खूब सराहा जाएगा। उनकी प्रतिनिधि रचनाओं में से एक होने के कारण मैं इससे परिचित हूँ इसे मंच से सुना है तालियों की गड़गड़ाहट ने इस रचना की प्रासंगिकता को हाथों हाथ प्रोत्साहित किया है यही अपेक्षा पाठक वर्ग से भी रहेगी।
मुस्कुराऊँ कैसे कविता में कवियत्री ने मानव जीवन में आने वाली समस्याओं को लेकर बहुत सुंदर चित्रण किया है। मानवीय संवेदनाएं भोर की किरण बन कर अंधेरों को चीर कर निकल जाना चाहती हैं। गुलशन फूल का बिखराना प्रतीकात्मक खुशियों को बिखेरने से जोड़ कर बहुत सुंदर उपमा का प्रयोग किया गया आस पास के माहौल में पनप रहे अविश्वास को आँधियाँ से छल फरेबों में बाजियाँ स्वार्थ सिद्धि की ही लग रही हैं। बेहतरीन यथार्थ को प्रस्तुत किया है। प्रतीकात्मक शैली प्रारम्भ से अंत तक जीवंत है बिम्ब का चित्रण स्पष्ट प्रदर्शित है। सरल कथ्य उत्तम भाव कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की कलम की विशेषता रही है जो इस रचना में भी स्पष्ट झलक रही है।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की यादें एक तुकांत कविता है जो गजलनुमा काफिये रदीफ़ की तरह लिखी गई है तुकांत का स्तर उत्तम नहीं है पर सरल भाषा शैली ने इस कविता की सृजन संरचना को चार चांद लगाए हैं प्रत्येक पद अपने आप में पूर्णता को प्राप्त है जैसे ग़ज़ल के शेर अपने आप में एक पूर्ण कहानी कह देते हैं ठीक उसी प्रकार इस तुकांत कविता का सृजन किया गया है। भाव गहराई लिए हुए हैं। कवयित्री का कटाक्ष देखें उजालों में रहने की ख्वाहिश तो है मगर, घर जो जला दे उन उजालों का क्या करें। इस प्रकार से सम्पूर्ण रचना पाठक वर्ग को सरलता से समझ में आने वाली है।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की रचना छाँव लगे प्रहरी में प्रतीकात्मक शैली का सजीव प्रयोग झलकता है तुकांत कविता के तुक सभी लाजवाब हैं सभी तुक सराहनीय हैं। यह कविता दिखने में छोटी है पर भाव गंभीरता लिए हुए हैं। विरह अग्नि की उपमा जेठ की दुपहरी और आस को छाँव सा प्रहरी खड़ा करके शानदार प्रतीकात्मक के साथ उपमा दर्शाई गई है जो सर्वत्र प्रशंसनीय है।
कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना का कलम से सम्बंध लगभग 25 वर्षों से निरन्तर चलता आ रहा है। तभी कलम की सुगंध परिपक्व झलकती है। इतनी समयावधि में अनेक नाटक लिखे हैं। जिन्हें आकाशवाणी द्वारा समय समय पर प्रसारित भी किया गया है। घर आंगन कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्त्ता के रूप में सजीव कार्यक्रम प्रस्तुत किये हैं। आकाशवाणी द्वारा वाणी प्रमाणपत्र प्राप्त कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना की कहानियाँ और कविताओं का प्रसारण होता रहा है । 6 लघु काव्य संग्रह, सपना की काव्यांजलि काव्य संग्रह एवं 50 से अधिक साझा संग्रह में रचनाएं प्रकाशित हो चुके हैं। ऐसे में इस उपलब्धि से कहा जा सकता है कि कवयित्री 'अनिता मंदिलवार सपना' पाठक वर्ग की समझ की उस नब्ज को अच्छे से समझती और जानती भी हैं जिसके कारण यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि कवयित्री का यह काव्य संग्रह "स्वप्न सिंदूरी " पाठक वर्ग द्वारा खूब सराहना प्राप्त कर सकेगा।
अंततः इतना कहना अवश्य बनता है कि कवयित्री ने जिन-जिन विषय को संग्रह में सम्मिलित किया है वे सभी विषय दिखने में जितने सरल और साधारण विषय दिखते हैं समझने में उतने ही गहराई लिए हुए हैं। पाठक वर्ग के सभी स्वाद इसमें भरे हुए हैं। कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना का अद्भुत एवं अनुपम काव्य संग्रह है ये स्वप्न सिंदूरी ... इसके प्रकाशक ए• के• वी• एस प्रकाशन वाराणसी हैं इसका कार्य भी अति सराहनीय है आवरण पृष्ठ से आंतरिक पृष्ठ चयन, चित्रांकन और टंकण सब शुद्ध रूप से निखार पर हैं। कवयित्री द्वारा इस संग्रह को अपने जीवन साथी को समर्पित किया है। शुभकामना संदेश 1. डॉ. प्रेमसाय सिंह, स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, सहकारिता छत्तीसगढ़ शासन 2. अमरेश्वर दुबे, पूर्व कार्यक्रम अधिकारी आकाशवाणी 3. महातम मिश्रा गौतम गोरखपुरी 4. जे पी श्रीवास्तव, प्रांताध्यक्ष, ट्रेड यूनियन कौंसिल छत्तीसगढ 5. गिरीश गुप्ता, जिला परियोजना अधिकारी, जिला लोक शिक्षा समिति, सरगुजा ने दिए हैं ।
काव्य-संग्रह की भूमिका शैलेन्द्र श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष कोरिया छत्तीसगढ़ , आँल इण्डिया ह्यूमन राइट्स एसोशियेशन (एहरा) नई दिल्ली, के कर कमलों से लिखी गई है जो पाठक वर्ग को कवियत्री से परिचित करवाने के लिए एक सार्थक प्रयास कहा जा सकता है। और अंत में समीक्षा का प्रभार मुझ संजय कौशिक विज्ञात को सौंपा गया जिसके लिए कवयित्री का आभार प्रकट करता हूँ।
पुस्तक का कमजोर पक्ष: कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना एक नाम ही पर्याप्त है जो त्रुटियों को दूर करने में सक्षम एवं समर्थ है। मेरे विवेक के अनुसार तो 'स्वप्न सिंदूरी ' काव्य-संग्रह में भक्तिरस, प्रेमरस, विरह रस, वीररस, करुणरस, विद्यमान होते हुए अनेक अलंकारों से अलंकृत काविताओं का सुगंधित उपवन है। जिसकी प्रत्येक कविता रूपी पुष्प की खुशबू पृथक एवं विशेष है। जिससे यह संग्रह सुवासित होता हुआ कलम की सुगंध को सदृश एवं आकर्षित बना देने में समर्थ सिद्ध है। कुछ एक स्थान पर टंकण दोष से इनकार नहीं किया जा सकता और कहीं कहीं लय बाधा भी दिखाई देती है। हालांकि कवयित्री के कंठ को माता वीणापाणि का विशेष वरदान प्राप्त है। जिसे आकाशवाणी का वाणी सम्मान सिद्ध भी करता है। तो इस कमी को वो स्वयं की गेयता में महसूस नहीं होने देंगी। अंततः इतना कहना अवश्य बनता है कि कवयित्री ने कविताओं के सृजन की साधना कुशलता पूर्वक संम्पन्न की है। संग्रह के मुख्य आवरण, शीर्षक और पृष्ठ संख्या ....132... सहित प्रकाशकीय मेहनत से संग्रह को चार चांद लग गए हैं। पाठक वर्ग कवियत्री के इस संग्रह को पढ़ने के बाद कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना के लिखे अन्य कविता संग्रह को भी पढ़ने की इच्छा रखते हुए उन्हें भी खोज कर अवश्य पढ़ेगा।
संजय कौशिक 'विज्ञात'
समालखा, पानीपत हरियाणा
पिन -132101